10 Tips to control babies anger |Hindi| बच्चों के गुस्से को नियंत्रित करने के 10 उपाय

Angry

क्रोध एक सामान्य मानवीय भावना है। कुछ अध्ययनों से पता चला है कि दो महीने की उम्र के बच्चे भी क्रोध प्रदर्शित करते हैं । क्रोध किसी भी उम्र के बच्चे में पाया जाता है । जब बच्चों की जरूरतें पूरी नहीं होती है तो वे अलग-अलग तरीके से अपने क्रोध को प्रकट करते हैं । जिससे लोग उनपर ध्यान दें और उनकी बात मान जाएं । बच्चे जब थोड़॓ बड़॓ होते हैं तो उनमें ‘self ‘ / ‘स्व’ की भावना विकसित हो जाती है । वे केवल अपने बारे में सोचने लगते हैं । वे तरह-तरह से अपना क्रोध दर्शाते हैं । वे अपना क्रोध Desperation/ हताशा, Disregard/ अवहेलना या Anger/ गुस्से के रूप में व्यक्त करते हैं । आपके इन्हीं परेशानियों को दूर करने के लिए मैं आपके समक्ष कुछ आसान से 10 Tips to control babies anger/बच्चों के गुस्से को नियंत्रित करने के 10 उपाय प्रस्तुत करूँगी । जिसे अपनाकर आप अपने बच्चे के गुस्से पर नियंत्रण पा सकते हैं ।

crying baby

गुस्सा करना बच्चे के सेहत के लिए अत्यंत नुकसानदायक होता है । अक्सर बच्चे रोकर, जमीन पर लोटकर, घर के सामानों को फेंककर अपना गुस्सा प्रदर्शित करते हैं । सार्वजनिक स्थलों पर जब बच्चे ऐसा करते हैं तो माता-पिता काफी परेशान हो जाते हैं । किसी भी माता – पिता के लिए उनके बच्चे का भविष्य बहुत बड़ी चुनौती होती है । यदि उनका बच्चा बात-बात पर क्रोधित होता है तो उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है । उन्हें बस एक ही चिंता सताते रहती है कि वे अपने बच्चे के इस क्रोध करने की प्रवृत्ति को कैसे सुधारें । ऐसे में उन्हें कुछ समझ नहीं आता है कि वे अपने बच्चे के इस व्यवहार के लिए क्या करें । बच्चों में गुस्सा प्रकट करने की यह आदत बहुत आम है । एक निर्धारित उम्र के बच्चों में यह प्रवृत्ति आ जाती है । लेकिन आप इससे बिल्कुल भी ना घबराएँ । आइए बात करते हैं 10 Tips to control babies anger/बच्चों के गुस्से को नियंत्रित करने के 10 उपाय –

  1. स्वयं शांत रहें –

जब भी आपका बच्चा गुस्सा करे सबसे पहले आप स्वयं शांत रहें । जब तक आप में संयम नहीं रहेगा आपका बच्चा भी शांत नहीं होगा । बच्चे हर चीज अपने माता- पिता से ही सीखते हैं । यदि उसके साथ आप भी गुस्सा करेंगे तो उसमें भी कभी संयम की भावना नहीं आएगी । आज के इस भागदौड़ वाली ज़िंदगी में चारों तरफ परेशानियाँ ही हैं । आजकल प्राय: माता-पिता working/ कामकाजी हैं । दिन भर की थकान के बाद अभिभावक प्राय: अपने बच्चों की किसी गलती पर नाराज होकर चिल्ला देते हैं । इसतरह का वर्ताव सरासर गलत है । आपको ऐसा करते देखकर आपका बच्चा भी यही सिखेगा । वह भी आपके साथ ऐसा ही व्यवहार करने लगेगा ।

screaming baby
smiling baby
  1. ध्यान भटका दें –

जब आपका बच्चा क्रोधित हो तुरंत उसका ध्यान भटकाने की कोशिश करें । उसके साथ दूसरी बातें करें । कई बार चीजें नहीं मिलने पर बच्चे रोने तथा चिल्लाने लगते हैं । यदि हम उनका ध्यान भटका दें तो वे बहुत ही आसानी से शांत हो जाएंगे । इसके साथ ही उनका क्रोध भी गायब हो जाएगा ।

  1. भरपूर समय दें –

अपने बच्चे को भरपूर समय दीजिए । कई बार बच्चे बड़ों का ध्यान खींचने के लिए भी गुस्सा करने लगते हैं । जब लोग उनपर ध्यान नहीं दे रहे होते हैं तब वे गुस्सा दिखाकर लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश करते हैं । इसलिए जरूरी है कि अपने बच्चे को भरपूर समय दिया जाए । उसे यह न लगे कि उसपर कोई ध्यान नहीं देता है ।

Family time with baby
  1. हिंसक प्रवृत्ति से बचें –

अपने बच्चे पर किसी भी कीमत पर हाथ मत उठाइए । बच्चों का हृदय कोमल होता है । मारने – पीटने से वे हिंसक प्रवृत्ति के बन जाते हैं । वे कभी भी आपकी इज़्ज़त नहीं करेंगे बल्कि आपके प्रति उनके मन में डर पैदा हो जाएगा । अपनी छोटी-छोटी गल्तियों को आपसे छुपाने लगेंगे । फलस्वरूप आपके ऐसे वर्ताव से उनके दिमाग पर बुरा असर पड़॓गा ।

Playing kids
  1. शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान दें –

अपने बच्चों को ज्यादा से ज्यादा Physical activities/ शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें । उनसे रोजाना व्यायाम करवाएँ । ज्यादा से ज्यादा खेल-कूद करवाएँ । Sports/ खेल – कूद या exercise/ व्यायाम करने वाले बच्चों को गुस्सा कम आता है । कुछ बच्चे दिन- भर टीवी या मोबाइल में लगे रहते हैं । इससे उनका दिमाग कभी भी विकसित नहीं होगा । इसलिए जरूरी है उनसे ज्यादा से ज्यादा भाग-दौड़ वाले खेल खेलने के लिए प्रेरित करें । इसके साथ ही उनसे Meditation/ ध्यान भी करवाएँ । ध्यान करने से भी गुस्सा कम आता है ।

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  1. नींद पूरी होने दें –

बच्चे की भरपूर मात्रा में नींद अत्यंत आवश्यक है । बच्चा पर्याप्त मात्रा में नींद लेगा तो उसका मन भी शांत रहेगा । यदि बच्चे की नींद ना पूरी हो तो वह पूरे दिन चिड़चिड़ाए रहता है और रोते रहता है । बात – बात पर गुस्सा भी दिखाता है । इसलिए आवश्यक है कि उसे रात में जल्दी सुला दें ।

Sleeping baby
studying baby
  1. अत्यधिक अनुशासित न हों –

बच्चों पर अत्यधिक discipline/ अनुशासन भी न रखें । उनके साथ खेलें तथा उन्हें ढ़॓र सारा प्यार दें । उनके साथ चित्र बनाएँ, इंडोर गेम्स इत्यादि करवाएँ । कहने का तात्पर्य है कि अपने बच्चे के साथ एक मित्र की तरह रहें ।

  1. स्वास्थ्य पर ध्यान दें –

बच्चे के health/ स्वास्थ्य पर अत्यंत ध्यान दें । कमज़ोर बच्चों को गुस्सा जल्दी आता है । अपने बच्चे के गुस्से को नियंत्रण करने में भोजन की अहम भूमिका होती है । उन्हें जहाँ तक सम्भव हो ताजा पकाया हुआ भोजन ही देना चाहिए । कोल्ड स्टोरेज में रखा भोजन नहीं खाना चाहिए । इसके साथ ही चिप्स के बदले फल का आनंद लेने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करें । भोजन का दिमाग पर सीधा प्रभाव पड़ता है । इसलिए बच्चे को समय पर भोजन का सेवन कर लेना चाहिए । इससे उनके स्वभाव या दृष्टिकोण पर एक निश्चित प्रभाव पड़ता है ।

Healthy baby
  1. सराहना करें –

यदि बच्चा अच्छा काम करे तो दूसरों के सामने उसकी प्रशंसा करें । इससे उसे लगेगा कि लोग उसके अच्छे कामों को भी ध्यान देते हैं न कि केवल बद्माशियों को । इसलिए उसकी सराहना करते रहना चाहिए ।

  1. आक्रामकता से बचें –

यदि आपका बच्चा Aggressive/ आक्रामक है तो अपनी खुद की जीवन-शैली देखें । आपको इस बात का हर समय ध्यान देना होगा कि आप अपने आस – पास के लोगों पर आक्रामक व्यवहार ना करें । वयस्क और बच्चे दोनों के लिए समान नियमों को लागू करने की आवश्यकता है । अपने बच्चे के सामने किसी भी इंसान पर गुस्सा ना दिखाएँ ।

Screaming Girl

अंत में मैं यही कहना चाहती हूँ कि आप अपने व्यवहार में शालीनता लाइए । आपका बच्चा स्वयं शालीन प्रवृत्ति का बन जाएगा । अत: आप 10 Tips to control babies anger/बच्चों के गुस्से को नियंत्रित करने के 10 उपाय पर ध्यान दें । इन उपायों पर ध्यान देने से आपका बच्चा जल्दी ही अपने गुस्से पर नियंत्रण करना सीख जाएगा ।  

आपको मेरा लेख 10 Tips to control babies anger/बच्चों के गुस्से को नियंत्रित करने के 10 उपाय कैसा लगा कृपया कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएँ । इसके साथ ही आप यदि कोई सुझाव देना चाहते हैं तो वह भी दे सकते हैं ।

12 Best Parenting tips |Hindi| परवरिश के 12 सर्वोत्तम तरीके

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किसी भी बच्चे के जन्म के बाद से ही उसके माता-पिता उसकी अच्छी परवरिश करना चाहते हैं । प्रत्येक माता- पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे सबसे अच्छे हों । उनमें सबसे अच्छे संस्कार हों तथा सभी लोग उनके अच्छे गुणों की वजह से उन्हें जानें । ऐसा तभी होगा जब आप अपने बच्चों को अच्छे गुण सिखाएंगे । एक बच्चे के अंदर अच्छे गुण उसके माता-पिता से ही आते हैं। माता – पिता सही आचरण रखेंगे तो बच्चा भी सही आचरण अपनाएगा । सभी बच्चे अपने माता – पिता का ही प्रतिनिधित्व करते हैं । लेकिन प्रत्येक बच्चा अलग होता है । प्रत्येक बच्चे का स्वभाव भी अलग होता है । इसी वजह से Parents को उनकी परवरिश करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है । आपके इन्हीं परेशानियों को दूर करने के लिए मैं आपके समक्ष कुछ आसान से 12 Best Parenting tips |Hindi| परवरिश के 12 सर्वोत्तम तरीके  प्रस्तुत करूँगी । जिसे अपनाकर आप अपने बच्चों को समझने के साथ-साथ उनकी अच्छी तरह से परवरिश भी कर पाएंगे ।

सबसे पहले तो आपको यह जानना जरूरी है कि Good Parenting का मतलब क्या है ? एक अच्छी परवरिश का मतलब केवल बच्चे को खाना खिलाना या उसकी जरूरतों को पूरा करना नहीं है । बल्कि उसे अच्छी तरह समझना तथा उसे अच्छे संस्कार देना है । आपको Child Psychology को समझना बहुत जरूरी है । जब तक आप यह नहीं समझेंगे आप एक अच्छे अभिभावक नहीं बन सकते हैं । तो आइए जानते हैं Best Parenting advice –

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  1. आप शुरु से ही अपने नवजात बच्चे के साथ ज्यादा से ज्यादा बात करें । आप अपने बच्चे से जितनी बात करेंगे वह आपकी भाषा भी जल्दी सीखेगा । जब आप उससे बात करें तो ध्यान रखें कि आपका तरीका सकारात्मक हो । उससे बात करते समय अपनी आवाज़ को Soft रखें । उनके साथ अपनी खुशी और दुख बाँटें । ऐसा करने से बचपन से ही वे अपने घर की परिस्थिति को समझेंगे । इसके साथ ही बच्चे में भी आपसे हर बात बताने की आदत रहेगी और साथ ही आपके करीब भी रहेंगे ।
  2. जब आपका बच्चा आपकी ध्वनियों को दोहराकर और शब्दों को जोड़कर आवाज़ करता है तो उसका उत्तर दें । उसे नज़र अंदाज़ ना करें । चाहे वह जिस रूप में भी आपके साथ जुड़ना चाहें उससे जुड़ने की कोशिश करें । छोटे बच्चे ध्यान खींचते हैं । जब आप उन्हें ध्यान देते हैं तो उन्हें अच्छा लगता है । बचपन से ही वह आपके साथ जुड़ जाता है । तथा उसे भी लगता है आप उसे महत्त्व दे रहे हैं ।
  3. अपने बच्चे के दिमाग को पढ़ने की कोशिश करें । आप जानने की कोशिश करें कि वह क्या चाहता है । छोटे बच्चे बोल नहीं पाते हैं । वह तरह – तरह के संकेतों से अपनी बातों को आपके सामने रखने का प्रयत्न करते हैं । उनके संकेतों को समझने की कोशिश करें ।
  1. छोटे बच्चों के साथ Baby Rhymes / कविताएँ गाएं । इससे उनका मनोरंजन भी होगा और वह आपके साथ समय भी बिता पाएँगे । इसके साथ ही बचपन से ही उनका दिमाग विकसित होगा तथा उनमें रचनात्मकता / creativity बढ़॓गी ।
  2. अपने बच्चे की तारीफ करें तथा उनका पूरा ध्यान रखें । जब भी आपका बच्चा कोई अच्छा काम करे तुरंत उसकी तारीफ करें । इससे उसे सही और गलत की पहचान होगी । इसके साथ ही वह कोशिश करेगा कि दोबारा कुछ अच्छा करे जिससे उसकी तारीफ हो ।
  3. अपने बच्चे को सीने से लगा कर यह एहसास दिलाएँ कि आप उससे अत्यंत प्यार करते हैं । उसे यह भी समझाने की कोशिश करें कि आप उसकी हर परेशानी में साथ हैं ।
  4. अपने बच्चे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएँ । जब आपका बच्चा सतर्क और तनावमुक्त हो तब आप उसके साथ खेलें । आजकल माता-पिता दोनों कमाते हैं । इस वजह से वह अपने बच्चे के साथ ज्यादा समय नहीं बिता पाते हैं । इससे बच्चा स्वयं को अकेला महसूस करने लगता है तथा उसका विकास भी ठीक से नहीं हो पाता है । इसलिए जरूरी है कि आपको जब भी समय मिले अपने बच्चे के साथ बिताएँ । उस समय कोई दूसरा कार्य ना करें ।
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  1. आप अपने बच्चे को बचपन से ही आत्म निर्भर बनाएँ । उससे उसके छोटे- छोटे कार्य स्वयं करवाएँ । जब उसका खेलना हो जाए तो उसके खिलौनों को व्यवस्थित ढंग से रखवाएँ । उसके प्लेटस उसी से रखवाएँ । यदि बच्चे ने खाना, खाना शुरू कर दिया हो तो धीरे-धीरे उसे स्वयं खाने के लिए प्रेरित करें । इस तरह के छोटे – मोटे कार्यों को करवाने से वह बचपन से ही आप पर निर्भर नहीं रहेगा ।
  1. यदि आपका बच्चा जिद करता है तो उसे मारे-पीटे नहीं । बल्कि उसे प्यार से समझाएँ । उसका ध्यान कहीं और भटकाएँ । जिससे वह उस बात को भूल जाए । छोटे बच्चे अत्यंत नाज़ुक और मासूम होते हैं । उनके साथ आप जैसा वर्ताव करेंगे वे वैसा ही सीखेंगे । उन्हें मारने-पीटने से वे और अधिक जिद्दी बन जाते हैं । अधिकांश माता-पिता अपने बच्चे को सुधारने के लिए उनपर चिल्लाते हैं तथा उन्हें मारते हैं । ऐसा करने से बच्चा कभी भी नहीं सुधरेगा । बल्कि और अधिक रोने लगेगा और जिद में वह भी चिल्लाने लगेगा । इसलिए अपने बच्चे को प्यार से समझाएँ कि उसने जो किया है वह गलत है ।
  1. अपने बच्चे को किसी भी तरह का लालच ना दें । अधिकांश अभिभावक अपने बच्चे से जब कोई बात मनवानी होती है तो उन्हें तरह – तरह के प्रलोभन देते हैं । अपने बच्चों को तरह- तरह की चीजों का प्रलोभन देना बिल्कुल गलत है । क्योंकि बाद में बच्चे लालची हो जाते हैं । वे आपकी किसी भी बात को नहीं मानेंगे और बात-बात पर आपसे अपनी माँगें पूरी करवाएँगे ।
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  1. माता – पिता को कभी भी अपना गुस्सा बच्चे पर नहीं निकालना चाहिए । उनके सामने अपशब्द का प्रयोग तो कदापि नहीं करना चाहिए । इससे बच्चे पर बहुत ही बुरा असर पड़ता है । माता- पिता को अपनी समस्याओं को बच्चों से दूर रख कर अपनी भाषा पर नियंत्रण करना चाहिए । चाहे कितनी भी बड़ी परेशानी क्योँ ना हो अपने बच्चों पर असर नहीं होने देना चाहिए । यदि कोई अभिभावक ऐसा करता है तो उसके बच्चे के दिमाग पर बुरा असर पड़ता है और वह चिड़चिड़ा हो जाता है ।
  2. छोटे बच्चों को ज्यादा से ज्यादा Physical Activity करवाएँ । इससे उनका शारीरिक विकास होगा । इसके साथ ही बच्चा घर पर है तो उसे खिलौनों से खेलने की आदत दें । उन्हें टीवी, लैपटॉप, स्मार्ट्फोन, टैबलेट की आदत ना लगाएँ । हाँलाकि आज टेक्नोलोजी का जमाना है । आप चाह कर भी बच्चों को इससे ज्यादा देर तक दूर नहीं रख सकते । इसलिए इन सब चीजों का एक समय निर्धारित कर दें । दिन भर इनका प्रयोग ना करने दें । यदि बच्चा दिन भर फोन, टीवी में ही लगा रहेगा तो उसके दिमाग का विकास नहीं होगा । इसलिए किसी भी गैजेट का प्रयोग एक निर्धारित समय सीमा में ही होना चाहिए । इसके साथ ही अभिभावकों को भी मोबाइल तथा अन्य गैजटों का प्रयोग कम से कम करना चाहिए । तभी बच्चे भी आपसे सीख कर इसका प्रयोग कम करेंगे ।

अंत में मैं यही कहना चाहूँगी कि यदि आप अपने बच्चे को एक अच्छा इंसान बनाना चाहते हैं तो पहले स्वयं को बदलने की कोशिश करें । आप जब तक स्वयं में अनुशासन नहीं लाएंगे आपका बच्चा भी अनुशासित नहीं रहेगा । इसके साथ ही माता-पिता को भी शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ रहना होगा । Parenting में कड़ी मेहनत हो सकती है । यदि आप स्वयं स्वस्थ रहेंगे तो आपके लिए भी अपने बच्चे की परवरिश करने में आसानी हो जाएगी ।

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Baby care tips for New Moms |Hindi| बच्चे की देखभाल नई माताओं के लिए

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माँ बनना किसी भी महिला के लिए अत्यंत खुशी की बात होती है । यूँ कहें तो माँ बनना एक महिला के लिए दूसरा जन्म होता है । नौ महीने के लम्बे इंतज़ार के बाद माँ अपने बच्चे को देखते ही अपने सारे कष्टों को भूल जाती है । अब नई माताओं के सामने बच्चे की देखभाल की ज़िम्मेदारी आ जाती है ।  उन्हें ज़रा भी अनुभव नहीं होता है कि बच्चे की देखभाल कैसे करें । इसलिए पहली बार माँ बनने पर Baby care tips को जानना अत्यंत आवश्यक है । मैं आपके समक्ष कुछ आसान से Baby care tips for New Moms/बच्चे की देखभाल नई माताओं के लिए प्रस्तुत करूँगी । इससे आपको अपने बच्चे की देखभाल करने में काफी सहायता मिलेगी । इसके साथ ही आपका बच्चा भी स्वस्थ रहेगा ।

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Baby care after Delivery / प्रसव के बाद शिशु की देखभाल –

  • सर्वप्रथम आपको यह ध्यान रखना होगा कि बच्चा माँ का दूध ही पिए । यदि बच्चा माँ का दूध नहीं पी सकता तो अपने Feeding Expert की सलाह लें ।
  • अस्पताल में परिवार वालों के अलावा किसी भी बाहर के लोगों से बच्चे को सम्पर्क में ना आने दें । इससे बच्चे को Infection हो सकता है ।
  • आप जब भी बच्चे को गोद में लें हाथों को अच्छी तरह सैनिटाइज़ कर के ही लें ।
  • अपने आस – पास सफाई पर विशेष ध्यान दें ।
  • आपके शिशु के Umbilical Cord / गर्भनाल की देखभाल करना अत्यंत आवश्यक है ।
  • बच्चा यदि Bottle Feeding कर रहा है तो उसके बोतल को अच्छी तरह से स्टरलाइज़ करना जरूरी है । बच्चे को दूध पिलाते समय बोतल को 45 डि. के कोण में रखकर ही पिलाएँ ।
  • बच्चे को ज्यादा से ज्यादा Swaddle कर के ही रखें ।
  • बच्चे को जब भी Feeding कराएँ अच्छी तरह से डकार दिलाएँ । इससे उनका पाचन सही रहेगा ।
  • बच्चे को छ : महीने तक माँ का दूध या फॉर्मूला दूध के अलावा कुछ भी ना दें । शहद इत्यादि बिल्कुल ना दें ।

How to carry a Newborn baby / बच्चे को गोद में लेने का तरीका –

नई माताओं को यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि बच्चे को गोद में कैसे लें । आप अपने Experts से जरूर सीखें कि बच्चे को गोद में किस तरह से लें । नवजात शिशु का अपने शरीर पर नियंत्रण नहीं रहता है । इसलिए उन्हें गोद में लेते समय उनके सिर को अच्छी तरह से पकड़ना अत्यंत आवश्यक है ।

Carry baby

Newborn Baby Feeding Time / नवजात शिशु को खिलाने का समय –

माँ का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम होता है । इससे बच्चे को Immunity आती है । कम – से – कम  छ: महीने तक शिशु को माँ का दूध अवश्य पिलाएँ । इससे उनका बौद्धिक विकास जल्दी होता है तथा वह स्वस्थ भी रहते हैं । नवजात शिशु को हर दो घंटों में Feeding कराना चाहिए ।

Newborn baby sleep / नवजात शिशु की भरपूर नींद –

नवजात शिशु की नींद पर भी हमें ध्यान देना जरूरी है । बच्चों के साथ खेलना किसे नहीं पसंद लेकिन इसके साथ उनकी नींद भी जरूरी है । किसी भी नवजात शिशु को 16 से 20 घंटे अवश्य सोना चाहिए ।

Baby sleep

Tips for Diaper Changing / डायपर बदलने के टिप्स –

अपने बच्चे का डायपर बार-बार जरूर चेक करते रहना चाहिए । छोटे बच्चों का डायपर बहुत जल्दी गंदा हो जाता है । इसलिए हमें यह ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है कि बच्चे का डायपर साफ है कि नहीं । बच्चे का डायपर समय – समय पर नहीं बदला गया तो उसे Infection हो सकता है ।

Tummy Time for Newborn baby / नवजात बच्चे के लिए पेट का समय–

अपने बच्चे को Tummy Time जरूर देना चाहिए । इससे उसका पाचन सही रहेगा और उसका विकास अच्छा होगा । Tummy Time आप कभी भी दे सकती हैं । जब भी आप अपने बच्चे के साथ खेल रही होती हैं उसे पेट के बल सुला दिया करें । इससे आपका बच्चा स्वस्थ रहेगा ।

Tummy time

Newborn baby massage / नवजात शिशु की मालिश –

नवजात शिशु की मालिश अत्यंत आवश्यक है । इससे उसकी मांस – पेशियाँ मजबूत होती हैं । आप प्रत्येक दिन किसी भी अच्छे से बेबी ऑएल से अपने बच्चे की मालिश कर सकती हैं । आपको जब भी समय मिले अपने हल्के हाथों से बच्चे की मालिश कर सकती हैं । एक बात का ध्यान रहे यदि किसी समय आपका बच्चा मालिश करवाना ना चाहे तो उसे बिल्कुल भी मालिश ना करें । किसी भी इंसान की मालिश उसके आराम के लिए होती है ना कि उसे तकलीफ देकर । छोटे बच्चे भी रोकर बताना चाहते हैं कि उन्हें मालिश नहीं पसंद आ रही है ।  इसलिए यदि आपके बच्चे को मालिश पसंद आ रही है तो आप दिन में जितनी बार चाहें उसकी मालिश कर सकती हैं ।

Baby massage

उपर्युक्त बातों का ध्यान रखने के साथ – साथ माँ को अपना भी ख्याल रखना अत्यंत आवश्यक है ।  माँ को पौष्टिक आहार जरूर लेना चाहिए क्योंकि इस समय माँ स्वस्थ रहेगी तभी बच्चे की अच्छी तरह देखभाल कर पाएगी । सबसे महत्वपूर्ण बात इस दौरान बच्चा माँ के दूध पर ही निर्भर रहता है तो माँ को अच्छी तरह से पौष्टिक आहार लेना चाहिए ।

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Teething issues in babies |Hindi| बच्चों में दाँत आने की समस्याएँ

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माता – पिता अपने शिशु के जन्म के बाद से ही उनके अंदर होने वाले हर बदलाव को लेकर काफी उत्साहित रहते हैं । शिशु का दाँत निकलना भी उनके जीवन का एक अभिन्न अंग है । इस समय शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास हो रहा होता है । अचानक से उनके स्वभाव में बदलाव होने लगता है । छोटे से शिशु बोल नहीं पाने के कारण रोते रहते हैं । उनके माता-पिता को भी समझ नहीं आता है कि उनके बच्चे में अचानक से यह बदलाव कैसे । कुछ बच्चे बहुत चिड़चिड़॓ हो जाते हैं । उन्हें किसी भी चीज में मन नहीं लगता है । अचानक से खाना बंद कर देते हैं । इस वजह से उनका स्वास्थ्य भी गिर जाता है । आपके इन्हीं परेशानियों जैसे Teething issues in babies| बच्चों में दाँत आने की समस्याओं को दूर करने के लिए कुछ आसान और घरेलू उपचार मैं आपके सामने प्रस्तुत करूँगी । लेकिन उसके पहले आपको दाँत निकलने की पूरी प्रक्रिया जानना बहुत जरूरी है ।

बच्चों में जो पहला दाँत निकलता है उसे दूध का दाँत कहते हैं । इस प्रक्रिया की शुरूआत 6 – 8 महीने का होता है । 3 वर्ष तक बच्चों के कुल 20 दाँत निकल जाते हैं । किसी – किसी babies में यह प्रक्रिया 3 महीने से ही शुरू हो जाती है लेकिन इसमें परेशानी वाली कोई बात नहीं है । प्रत्येक बच्चा अलग होता है । हर बच्चे का शरीर अलग होता है ।

बच्चों के जब दाँत निकलते हैं तो उनके मसूड़॓ फूल जाते हैं और लाल भी हो जाते हैं । इस वजह से उन्हें मसूड़॓ में काफी जलन होती है । मसूड़ा जब फूलना शुरू होता है उसके पाँचवे या छठे दिन के बाद दाँत फटकर बाहर आ जाते हैं । यह पूरी प्रक्रिया 1 से 10 दिन का होता है ।

कैसे पता चले कि बच्चे का दाँत निकलने वाला है –

  • उन्हें हर चीज अपने मुँह में डालने की इच्छा होती है ।
  • वह अपनी ऊँगलियों को हर समय अपने मुँह में डालते रहते हैं तथा किसी भी चीज को वह अपने मुँह में डालने की कोशिश करते हैं ।
  • बिना किसी बात के बच्चे रोते रहते हैं ।
  • बच्चे के मुँह से हर समय लार टपकते रहता है ।
  • मसूड़॓ में सूजन आ जाती है ।
  • अचानक से बच्चे का स्वास्थ्य गिर जाता है । बच्चा सुस्थ पड़ जाता है ।
  • बच्चे को किसी भी चीज में रूचि नहीं होती है । वह चिड़चिड़ा – सा वर्ताव करने लगता है ।
  • सोने में मुश्किल होती है ।
  • बच्चे के शरीर के तापमान में हल्का सा बदलाव आ जाता है ।
  • बच्चे की भूख अचानक से चली जाती है ।
  • कुछ बच्चे अचानक से शरारती हो जाते हैं । उधम मचाने लगते हैं ।
  • कान खींचना ।

Teething issues in babies| बच्चों में दाँत आने की समस्याओं से उभरने के कुछ उपाय –

  • जब बच्चे के दाँत में जलन हो तो अपनी ऊँगलियों को अच्छी तरह से साफ करके उनके मसूड़॓ को हल्के से दबाने से उन्हें काफी राहत मिलती है । आप किसी साफ कपड़॓ से भी यह प्रक्रिया कर सकते हैं ।
  • गाजर, मूली या चुकंदर को फ्रिज में हल्का ठंडा करके बच्चे के हाथ में दे सकते हैं जिससे वह उसे चबाए और उसे राहत मिले ।
  • टीथर्स से भी बच्चे को आराम मिलता है । लेकिन इसका प्रयोग अपने बच्चे के डॉक्टर से पूछ कर सही टीथर ही ले आएँ ।
  • बच्चे का ध्यान अन्य चीजों में लगाने की कोशिश करें । उसके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएँ । उसके साथ खेलें तथा उसका पूरा ध्यान दें ।
  • बच्चे को हल्का ठंडा खाना दें । गरम खाने से उसे और तकलीफ होगी ।
  • साफ सफाई पर विशेष ध्यान दें ।

उपर्युक्त इन बातों का ध्यान देने से नए माता – पिता का जीवन आसान हो जाएगा और आप अपने बच्चे की देखभाल सही तरीके से कर पाएँगे । अत: जो Teething issues in babies| बच्चों में दाँत आने की समस्याएँ हैं वह भी दूर हो जाएंगी । कुछ कल्पित कथाएँ भी आपको सुनने को मिलेंगी । जैसे दाँत निकलने के समय बच्चे को दस्त हो जाता है । आपको यह बता दूं दस्त दाँत निकलने की वजह से नहीं होता है बल्कि इस वजह से होता है क्योंकि इस समय आपके बच्चों के दाँतों में जलन होती है और उसे शांत करने के लिए बच्चे हर चीज मुँह में डालते हैं और इसी वजह से उनके पेट में गंदगी के जाने के कारण दस्त वगैरा हो जाता है । इस दौरान बच्चों के मुँह से लार टपकता है और काफी लार अंदर उसके पेट में भी जाता है और इसी वजह से भी गंदगी उसके पेट में जाती है और बच्चा बीमार पड़ जाता है । इन सब बातों में ध्यान ना दें और जो आपके डॉक्टर कहते हैं उनका ध्यान दें । आपके बच्चे की यह पूरी प्रक्रिया बहुत ही अच्छी तरह से बीत जाएगी ।

आपको मेरा लेख Teething issues in babies| बच्चों में दाँत आने की समस्याएँ कैसा लगा कृपया कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएँ । इसके साथ ही आप यदि कोई सुझाव देना चाहते हैं तो वह भी दे सकते हैं ।

7 Tips to make newborn baby sleep |Hindi| नवजात शिशु को सुलाने के 7 उपाय

Newborn Baby Sleep

किसी भी शिशु के जन्म लेते ही घर में खुशी का माहौल छा जाता है । चारों तरफ बच्चे की किलकारी गूँजने लगती है । अचानक से जैसे पूरे घर की रौनक ही बदल जाती है । शिशु के माता-पिता तो जैसे अपने बच्चे में ही व्यस्त हो जाते हैं । लेकिन इस व्यस्तता में भी हमें यह ध्यान रखने की अत्यंत आवश्यकता है कि हमारे बच्चे की नींद सही से पूरी हो रही है या नहीं । बच्चे को माँ के गर्भ में जिस तरह सोने की आदत होती है वह बाहर भी वही वातावरण चाहता है । वह उसी आराम की उम्मीद बाहर की दुनिया में करता है । उसे वह आराम नहीं मिलता है तो वह रोकर अपनी सबसे करीबी माँ को बताने की कोशिश करता है । चूँकि माँ को अनुभव नहीं होता है इसलिए वह शुरू में अपने बच्चे के रोने का कारण समझ नहीं पाती है । Newborn baby रात भर ठीक से नहीं सोने के कारण रोते रहता है । आपके इन्हीं परेशानियों को दूर करने के लिए मैं लेकर आई हूँ – 7 Tips to make newborn baby sleep |Hindi| नवजात शिशु को सुलाने के 7 उपाय जिसका पालन करने से नए माता-पिता का जीवन सरल हो जाएगा ।

सबसे पहले तो आपको यह जानना बहुत जरूरी है कि 0-3 महीने के newborn baby को रात में कितनी देर सोना चाहिए । 0-3 महीने के शिशुओं को ज्यादा से ज्यादा 16 घंटे जरूर सोना चाहिए । नवजात शिशु हर दो घंटे पर फ़ीडिंग के लिए उठते हैं । यदि शिशु ना उठे तो उसे उठा कर फीडिंग जरूर कराना चाहिए । इसके बाद उसे तुरंत सुला देना चाहिए ।

यदि आपका शिशु ठीक से ना सोए तो वह काफी रोता है और चिड़चिड़ा भी हो जाता है । छोटे बच्चे अपनी समस्याओं को बता नहीं सकते हैं । इसीलिए वह रोकर अपनी बातों को बताने की कोशिश करते हैं ।  ऐसे में उन्हें बड़॓ प्यार से देखभाल की जरूरत होती है । अब बात करते हैं  7 Tips to make newborn baby sleep |Hindi| नवजात शिशु को सुलाने के 7 उपाय

  1. सबसे पहले तो जिस समय आपको अपने शिशु को सुलाना है उसका एक रोज का समय जरूर निर्धारित कर लीजिए । उस समय को बदलिए नहीं । हर दिन सोने का समय बदलने से शिशु भ्रमित हो जाएगा कि उसे सोना कब है । इसलिए समय निर्धारित करना अत्यंत आवश्यक है ।

  2. सुलाने से पहले माँ को चाहिए कि अपने शिशु को बड़॓ ही प्यार से आरामदेह मालिश दे । इससे शिशु के बदन में दर्द भी रहा तो मालिश से दूर हो जाएगा । उसके बाद हल्के गुनगुने पानी से उसे स्पंज बाथ दें । इससे आपके शिशु को आराम महसूस होगा और उसे अच्छी नींद आएगी ।

  3. यदि सर्दी का मौसम है तो उसे हल्के गरम कपड़॓ पहना कर सुलाएँ और यदि गर्मी का मौसम है तो उसे हल्के आरामदेह कपड़॓ पहना कर सुलाएँ । बच्चे को किसी भी मौसम में अतिरिक्त टाइट (तंग) कपड़॓ ना पहनाएँ जिससे उसे तकलीफ हो । मौसम के अनुकूल आरामदेह कपड़॓ पहना कर सुलाने की कोशिश करें ।  

  4. सोने का वातावरण अनुकूल होना चाहिए । उसे उसके ही कमरे में सुलाएँ । इधर – उधर ना सुलाएँ । उसे बचपन से ही पता होना चाहिए कि उसे उसके ही कमरे में सोना है । उसे उसके कमरे में ले जाते ही धीरे-धीरे उसे यह समझ आ जाएगा कि अब उसके सोने का समय हो चुका है । सुलाने के समय कमरे में अंधेरा होना बहुत ज़रूरी है । इससे शिशु को नींद जल्दी और अच्छी आएगी । यदि रात में उसकी नींद खुल भी जाए तो रोशनी ना करें नहीं तो बच्चा जग जाएगा और सो नहीं पाएगा ।

  5. आप उसे लोरी गाकर या पालने में रखकर झुलाते हुए सुला सकते हैं । एक ही कमरे में गोद में लेकर घूम- घूम कर भी सुला सकते हैं । लेकिन इस बात का भी ध्यान दें जब शिशु को नींद आने लगे तो उसे तुरंत उसके बिस्तर पर सुला दें वर्ना उसे गोद की आदत लग जाएगी और जब भी आप उससे दूर जाएँगी वह उठ जाएगा ।

  6. आपके शिशु को सुलाने के समय रोज एक ही कमरे का इस्तमाल करें जिससे रात में जब आप उसे उस कमरे तक ले जाएँ उसे धीरे-धीरे यह आभास होने लगे कि अब मुझे सोना है ।

  7. शुरू में जब आप अपने शिशु का नियमित कार्यक्रम बनाएँगी हो सकता है वह उस नियमित कार्यक्रम में ना ढले। लेकिन आप इससे घबराएँ नहीं, उस नियमित कार्यक्रम का रोज़ पालन करें । आपका शिशु भी अपने नियमित कार्यक्रम को समझ जाएगा तथा उसके अनुसार ढल जाएगा ।

उपर्युक्त 7 Tips to make newborn baby sleep |Hindi| नवजात शिशु को सुलाने के 7 उपाय नियमों का पालन करने में एक बात अत्यंत आवश्यक है धीरज । जब तक आपमें धीरज नहीं होगा आप अपने शिशु का रूटिन नहीं निर्धारित कर सकते । हो सकता है शुरू में आपको तकलीफ हो लेकिन धीरे-धीरे आपका जीवन सुखमय होते जाएगा ।

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